शिप्रा शुद्धिकरण योजना के अंतर्गत उज्जैन नगर के 9 नालों पर सपवेल का निर्माण कर गंदे पानी को सदावल ट्रीटमेंट प्लांट ले जाने की योजना शुरू की गई थी। जिसमें बरसात के 4 महीने को छोड़कर बाकी समय में नालों का गंदा पानी इकट्ठा का पंप के माध्यम से सदावाल ट्रीटमेंट प्लांट ले जा कर पानी को शुद्ध किया जाता है। शुद्ध हुए पानी को आसपास के किसान अपनी खेती के लिए उपयोग करते हैं। मगर इस साल अक्टूबर माह खत्म होने को आया है। अभी तक संपवेल पर बने पंप शुरू नहीं किए गए हैं। इसके चलते गंदे नालों का पानी शिप्रा में मिल रहा है। साथ ही सदवाल ट्रीटमेंट प्लांट के आसपास के गरीब किसान सिंचाई के लिए पानी को तरस रहे है। ट्रीटमेंट प्लांट से साफ होकर मिलने वाले पानी से करीब 1000 बीघा जमीन की सिंचाई की जाती है। पंप बंद रहने से किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। और वह आगामी समय गेहूं की बोनी नहीं कर पा रहे। इसको लेकर समाजसेवी प्रकाश परमार ने बताया कि शिप्रा नदी में गंदे नालों का पानी सीधे तौर पर मिल रहा है । दरअसल यह पानी फिल्टर करने के बाद नदी में मिलता था। परंतु फिल्टर प्लांट बंद होने की वजह से अब सीधे तौर पर गंदा पानी नदी में मिल रहा है। जब बारिश का मौसम आता है उस दौरान फिल्टर प्लांट की मशीनें रिपेयर करने के लिए भेज दी जाती है । परंतु इस बार फिल्टर प्लांट की मशीनें रिपेयर नहीं की गई जिसकी वजह से वे बंद है। यहां बता दें कि शिप्रा नदी में गंदे नालों का पानी मिलने से रोकने के लिए समय-समय पर साधु-संतों और समाजसेवियों ने आंदोलन भी किए हैं । परंतु किसी भी प्रकार का कोई स्थाई हल नही निकल सका।

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