उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव ने बताया कि उनके प्रयास से उक्त घड़ी का निर्माण जीवाजी वेधशाला परिसर में करवाया जा रहा है। उज्जयिनी कालगणना की दृष्टि से वैश्विक स्थान रखती है। इसे देखते हुए इसे पुर्नस्थापित करने हेतु उक्त प्रयास किया जा रहा है। ख़ास बात यह है की यह घड़ी वैदिक कालगणना के सिद्धांतों पर आधारित होगी। प्रतिदिन सूर्योदय में होने वाले परिवर्तन तथा देश-दुनिया में अलग-अलग स्थानों पर होने वाले सूर्योदय को भी सिंक्रोनाइज किया जाएगा। वैदिक घड़ी की एप्लीकेशन में विक्रम पंचांग समाहित रहेगा। ग्रह स्थिति,योग, भद्रा स्थिति,चंद्र स्थिति,पर्व,शुभाशुभ मूहुर्त, नक्षत्र,जयंती,व्रत,त्यौहार,चौघडिय़ा,सूर्य-चंद्र ग्रहण, प्रमुख अवकाश, आकाशीय ग्रहों की स्थिति,धूमकेतु की स्थिति आदि की जानकारी,ज्योतीषिय जानकारी आदि मिलेगी। इस वैदिक घड़ी एप्लिकेशन को मोबाइल,एलईडी,स्मार्ट टीवी,टैब, डिजिटल घड़ी आदि पर अवश्य देखा/दिखाया जा सकेगा। वैदिक घड़ी के बैकग्राउंड ग्राफिक्स में सभी ज्योतिर्लिंग,नवग्रह,राशि चक्र, सूर्योदय,सूर्यास्त आदि रहेगा।

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