मप्र सरकार ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा कृषकों के बच्चों के लिए शुरू की गई 30% तक के अनुदान वाली स्वरोजगार योजना सहित तीन योजनाओं को अचानक बंद कर दिया गया है। इन योजनाओं में स्वरोजगार और उद्मम लगाने के लिए बैंकों से कर्ज लेने पर मप्र सरकार अनुदान के साथ बैंक की प्रचलित ब्याज दरों में 6% तक की सब्सिडी देती है।

प्रदेश सरकार के लघु, सुक्ष्म और मध्यम उद्यम विभाग के सचिव ने प्रदेश की सभी बैंकों को पत्र लिखकर दो टूक लहजे में कहा है कि वे इन तीन योजनाओं मे एक भी आवेदन अनुदान या फिर सब्सिडी के लिए न भेजें। बैंकों के पास इन तीन योजनाओं में कोरोना काल में अलग-अलग वजहों से नौकरी गंवाने वाले करीब 80 हजार लोगों ने लोन के लिए आवदेन किए थे। इसके बाद बैंकों ने अनुदान और ब्याज सब्सिडी की स्वीकृति के लिए प्रकरण राज्य सरकार को भेज थे।

राज्य सरकार ने बैंकों को भेजे गए पत्र में कहा है कि इन तीन योजनाओं के तहत जिन प्रकरणों में राज्य सरकार से सब्सिडी और अनुदान की स्वीकृति मिल चुकी है। उनका वितरण भी रोक दिया जाए। साथ ही नए आवेदकों के प्रकरण अनुदान और ब्याज सब्सिडी के लिए न भेजे जाएं।

सरकार के इस कदम से बैंक खासे परेशान हैं। क्योंकि जिन 80 हजार लोगों ने इन तीन योजनाओं के तहत आवेदन किए थे। उनमें से करीब 35 हजार प्रकरण तो ऐसे हैं जिनमें राज्य सरकार से अनुदान की मंजूरी मिल भी चुकी है। राज्य सरकार किे उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि हर साल इन तीन योजनाओं में राज्य सरकार करीब 800 करोड़ रुपए का अनुदान और ब्याज सब्सिडी देती है।

लेकिन इस बार कोरोना के संकट और प्रधानमंत्री स्वनीधि में राज्य सरकार द्वारा दी गई 4 हजार रुपए की अतिरिक्त राशि से राज्य सरकार संसाधनों की कमी से जूझ रही है। इसलिए राज्य सरकार ने इन तीन योजनाओं में सब्सिडी और अनुदान में रोक लगा दी है।

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